दिल्ली तू भी तो कुछ बोल
आखिर कब तक मौन रहेगा
आसमान से धरती तक
अब काँप रही है
जगत नियंता को ही केवल
झाँक रही है
सत्य सनातन डोल रहा है
इंसानों के भी बंद हैं बोल
दिल्ली तू भी तो कुछ बोल।
वीर कुँवर भी अब रहे नहीं
राणा नाना भी स्वर्ग सिधारे
वीर भगत के हुये कंठ अवरुद्ध
अन्यायी के देख कृत्य विरुद्ध
सारे बाँके यूँ ही रहे हैं डोल
दिल्ली तू भी तो कुछ बोल।
💐💐@मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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