डूब मरो शरम से।
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कल मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा"डूब मरो शरम से"।मैं तो सुनकर सोंच में पड़ गया।आखिर डूब भी मरूँ तो कहाँ और कैसे?मैं जहाँ रहता हूँ वहाँ डूबने के साधन ही नहीं।नदी है पर अभिशप्त।पानी का नामोनिशान नहीं।तालाव भी हैं पर सब सूखे।कूआँ तो अब फेसबुक पर ही दिखाई पड़ता है कभी कभी।बात अगर चुल्लु भर पानी की करें तो वह भी नसीब नहीं।क्योंकि पानी का टैंकर मुहल्ले में लगते ही आगे आगे लंबे लंबे बाल वालों की पंक्ति हँड़िया डबरा के साथ।उसके पीछे उसके डेढ़ दर्जन चेंगने मेंगने ।नहाने कपड़ा धोने से लेकर बर्तन माँजने को तैयार।नतीजा चुल्लु भर के लिये भी मेरा नंबर आते आते बूँद बूँद टपकना शुरु हो जाता है।अब भला बूँद भर में नाक तो डूबेगी नहीं फिर मरूँ भी तो कैसे?चलिये एक रास्ता और है जो मौत तक पहुचा सकता है ,देखते हैं शायद मित्र का चैलेंज पूरा कर सकूँ।चलता हूँ बिजली का करेंट लगाने सुनते हैं इससे बड़ी जल्दी मौत आती है।ले बलैया ई का जैसहीं बिजली का नंगा तार पकड़ने के लिये अपना हाँथ बड़ी मुश्किल से बढ़ाये लाईने कट गया।अब इंतजार भी केतना देर करें।कोई ठिकाना है कब लाईन आवेगा।अगर आ भी गया तो फिर हाँथ बढ़ाते कट जायेगा तब का करेंगे।बड़ा फजीहत हैअब मरना भी ।मेरे मित्र ने कहा है शरम से मरने को।भाई अब शरम है कहाँ ?तीस बरस हो गये झेलते झेलते एतना दिन का शरम बैठा रहेगा!अच्छा एक जगह और है वहाँ भी कोशिश कर लेते हैं ।बड़का बड़का नाला और छोटकी छोटकी नाली भी है शहर में।बड़ा बड़ा गटर और मेन होल भी है।ऊ सब जहाँ तहाँ ढक्कन खोल के रखता है।सालो भर कीचड़ से बजबजाता और पोलिथिन के पैकेट तैरते रहता है नाला नाली में।जरूर मरे भर पानी होगा उसमें।ल ई का उहाँ नजदीक जाये ला भी सोंचे पड़ रहा है।दूरे से सड़ल महक रहा है।उबकाई नियन लग रहा है।अब ऐहू अंतिम प्रयास विफले हो गया।अब फिर कुछ तरकीब सोचेंगे तब तक आईये बताते हैं आपको कि मेरे मित्र एतना खिसिआयल काहे हैं हमरा पर।बात आज से तीस बरस पहिले का है।तब से आज तक झेल रहे हैं।दरसल उस समय मेरे दुनो हाँथ में बिमारी हो गया था।बढ़िया से काम नहीं कर रहा था।डाक्टर के पास गये देखाये त ऊ बोले कि ठीक हो जायेगा ईलाज थोड़ा लंबा चलेगा।मैने कहा कोई बात नहीं ठीक हो जायेगा न!केतना दिन तक बरदास्त करना होगा?डाक्टर साहेब बोले फिलहाल पाँच बरस के दवाई लिखते हैं खाईये तब तक शायद ठीक हो जाये!मैने कहा चलिये आपका बात मान लेते हैं।दवाई खाते पाँच बरस बीत गया ।बकि कोई खास फायेदा नहीं बुझाया।हाँ एक हाँथ थोड़ा बहुत काम करने लगा।वैसे भी एक हाँथ तो जादे चलबे करता है सबका।दुनो बराबर चले तब न।फिर गये डाक्टर साहेब के पास।बोले कि का डाक्टर साहेब पाँच बरस हो गया अभी तक कोई विशेष फायदा नहीं बुझा रहा है आपके दवाई से।ऊ बोले देखिये आपका बिमारी पुराना है ।समय लगेगा।एक हाँथ तनिमनि काम कर रहा है न!पाँच बरस और अभी यही दवाई खाईये ठीक हो जायेगा।यही क्रम पिछले तीस बरस से चल रहा है।विश्वास करके दवाई खा रहे हैं बकि फायेदा के नामे नहीं है।फिर पाँच बरस पूरा होवे वाला है।अब तो एक हाथ एकदम से काम करना बंद कर दिया है।कोई घटना भी शहर में घटता है त उसपर भी नहीं उठ पाता ।अभी ताजा घटना एगो घटा मेडिकल कालेज में एगो मेहरारू के साथे ई मरलाहा कोरोना के लाकडाउन में।एगो डाक्टर उसके साथ छेड़खानी किया ऊ बेचारी सदमा से मर गई।बकि ई हाँथ ऐसन की एकदम उठे के लायक हैये नहीं है।ई लौकडाउन में गरीब गुरबा सबके बिना जात पुछले अनाज देवे के आदेश ऊपर से है बकि हियाँ ओकरो में जात पूछ के देवल जा रहा है।शहर में आम दिन केतनो खून खराबा हो जाये,कोई अफसर चाहे सरकारी मुलाजिम अपना मनमाना करे ,शिक्षा के मसला हो,स्वास्थ्य के मामला हो,पुलिसिया दबंगै होवे,बिजली,पानी,सड़क,गली,नाली कुछो भी समस्या हो ई हाथ एकदम से लटकल रहता है।उठिये नहीं सकता है।एही सब चक्कर में मेरे मित्र ने सलाह दिया मुझको कि बाबा तीस बरस से आप ई डाक्टर के दवाई विश्वास करके खा रहे हैं बकि अब तो ठीक होवे के बजाये ई एक हाथ तो एकदमें काम करना बंद कर दिया!एकदम से सूख गया है।यही चलते कमजोरी भी एतना हो गया है कि मुँह से भी आवाज नहीं निकलता है।अगर जान बचाना है तो अबरी ई हाथ को कटवा दीजिये।आर्टिफिशियल हाथ लगवा लीजिये।आजकल ऊ भी ओरिजिनल नियन काम करता है।आऊ न बात मानना है तो तीस बरस से झेल रहे हैं महाराज डूब मरिये शरम से।अब हम तो तबे से सोंच रहे हैं का करें,हाँथ कटवा दें कि फिर पाँच बरस ओही दवैया खाके देखें!
💐💐@मनोज कुमार मिश्र "पद्मनाभ"।
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