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कोरोना।

हर चमकता पीला जैसे 
सोना नहीं
आ जाये गर हल्की छींक कभी
घबराना मत
क्योंकि यह छींक कोरोना नहीं
चाहते हो गर जीवन में 
रोना नहीं
धोना हाँथ साबुन से बीस पल
होगा कोरोना नहीं
फ्रीज का पानी  कोल्डड्रिंक न पीना कभी
पीते रहे गर पानी गरम 
कसम से कहुँ बचोगे कोरोना से तभी
नहीं जायेगी जान 
तुलसी का लिया जो अनुपान
जब तक पास नहीं आयेगा इंसान
गले मिलना हाथ मिलाना 
छोड़ दो अब बस
जोड़ो दोनो हाथ बना रहेगा
दीर्घावधि साथ
प्रकृति को मान लो नाथ
गो गंगा गायत्री को करो सनाथ
न करो तुम धरा को
अनाथ
न काटो वृक्ष को बेवजह कभी
वर्ना रोओगे एक दिन
सर पे रख दोनो हाथ
मंदिरों को देख कर बंद कभी ये न समझना
भगवान तो है नहीं कपाट बंद है
जाकर देख लो हस्पतालों मे
सफेद वस्त्रधारी चिकित्सक के साथ
भगवान ही सेवानंद है
अनुशासन ही बनाता है महान
अब तो तू इसको मान
बंद रह कुछ दिन घर में अपने ही
बचाना है तुझको तेरे प्राण
मदिरा मांस का न कर तू भक्षण
प्राकृतिक संपदा का कर संरक्षण
यही करेंगे तेरी जान का रक्षण
💐💐@पद्मनाभ******

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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

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