मैं मानता हूँ आपको
आप जो कहेंगे सब जानता हूँ
गलत है ये मैं भी कहता हूँ
नहीं करना चाहिये ऐसा
हो रही हैं परेशानियाँ
मैं भी सहता हूँ
इसी इलाके मे रहता हूँ
सोचता हूँ सब समझता भी हूँ
पर क्या करूँ लाचारी है मेरी
देश के प्रति खुद्दारी है मेरी
तिरंगा है मेरे हाथ
लिया हूँ संविधान की प्रति भी साथ
जो कसमें खायी हैं
उसको भी निभानी है
देश से ऊपर है संविधान
ये भी मैंने जानी है
दे दूँगा जान
कर दूँगा सबकुछ कुर्बान
ये भी मैंने ठानी है
आपस में हमारा रिश्ता है
भाईचारगी का
व्यवहार भले हो आपस में
आवारगी का
रिश्ता गर रिसता हो तो
रिसने दो भैंस मेरी
बँधेगी इसी चौमुहाने पर ।।
💐💐@पद्मनाभ💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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