हर बाग में आग
आखिर हो क्या गया है आज
सब स्तब्ध मौन
लगता है चिरनिद्रा में सो गया है समाज
आक्सीजन की जगह कार्बनडाईऑक्साइड
हर पन्ने पर एक ही स्लाइड
न कोई मार्गदर्शक ना ही गाईड
सबके सब अपसेट माईंड
हर चौक चौराहा सबसाईड
अब तो लपटों का रुख
झोपड़ियों की ओर भी होने लगा है
डर है कहीं धधक न जाये
हर शहर हर गाँव
सोंचा है कभी कहाँ मिलेगा ठाँव
घुट घुट कर मरने को विवश हो जाओगे
जली हुई राख में क्या ढूँढ पाओगे
कुर्सी भी कहीं दिखेगी क्या
आखिर सियासत की हुकूमत
कहाँ बैठकर चलाओगे?
कलिंग विजय के पश्चात
क्या बौद्ध धर्म अपनाकर शांतिसंदेश का
पाठ पूरी दुनियां को पढ़ाओगे।।
💐💐@पद्मनाभ💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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