मेरे एक मित्र ने मुझपर तंज कसा
आप भी वादी हैं क्या
मैंने कहा समझा नहीं
क्या कहा आपने वादी?
मैं !अरे भाई मैं तो प्रमादी हूँ
अगर वादी होता तो
विवादी भी होता यार
अरे हाँ याद आया
मैं तो वादी विवादी से इतर
अवसादी हूँ मेरे यार
बिल्कुल वाल्मीकि की तरह।
दिखते जब भी कहीं जोड़े
तड़पते हुये क्रौंच पक्षी के
अनायास फूट पड़ते हैं स्वर
मा निषाद प्रतिष्ठांत्वम्मगमः
शाश्वती समा
अब तुम्हीं बताओ यहाँ
कोई वाद दीखता है क्या?
प्रगतिवाद
अवनति वाद
फासीवाद
भक्तिवाद
जातिवाद
सम्प्रदायवाद
ब्राह्मणवाद
क्षत्रियवाद
शूद्रवाद
आत्मवाद
परमात्मवाद
अनात्मवाद
या फिर
कहीं कोई विवाद?
सबने कहा
वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजी होगी गान।
तुलसी हों या कि हों सूर
मलिक मुहम्मद जायसी हों
या हों पंत निराला
सबके सब आला
नहीं दिखता कहीं कोई झाला
न ही वादों विवादों की माला
दिखता गर कहीं तो बस अवसाद
अवसाद और प्रमाद
या फिर
Blow Blow the Winter Wind.
@**********पद्मनाभ💐💐💐💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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