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रेलमपेल।

बड़ी रेलमपेल है
सब सियासत का खेल है
एनारसी क्या है
क्या है कैब
हमें कहाँ मालूम है साहेब
ऊ तो नेता जी जाने
जो गये थे हमको गाँव से लाने
हमको बताया था आज का खेल
महँगा हो गया है लहसुन प्याज आउ तेल
हम ठहरे निपट गँवार
हमें क्या पता क्या कर रही है केन्द्रसरकार
चार पूड़ी थोड़ी शब्जी एक लड्डू हमें पकड़ा दिया
यहाँ शहर में लाकर सबके सामने फिसड्डू बना दिया
हमें बताया गया निकाल दिया जायेगा
मुसलमान इस देश से
बाबू सच कहें अब तो घीन आती है देखकर
ई खादी और टोपी वाले वेष से
कल निर्भया का रेप हुआ
जिन्दा जला दी गई
हैदराबाद की बहना 
हैवानियत की आग जली
पर सबके सब थे मौन
आज राष्ट्रहित के एक बिल ने
सबको बिलबिला कर रख दिया
सिनेमा हो चाहे संसद 
सबको हिलाकर रख दिया
कल गदहे बेचकर सो रहे थे खर खर
आज मेढकी की तरह कर रहे हैं सब टर टर
जिसको संविधान का हिज्जे भी नहीं आता
वह चौक चौराहे पर सबको मतलब समझाता
धरम ईमान कर्म सब कुर्बान हो गये
राजनीति की परिभाषा को न जान आज
नेता महान हो गये।।
@**********पद्मनाभ।

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रावण का काम तमाम।

रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

टोटके।

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