फल्गू में पानी।
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आयेगा
फल्गू में पानी
बचपन में सुनी थी
एक कहानी
अपनी नानी की जुबानी
तब नहीं होता था
विश्वास
फिर भी तब से ही
मन में जगी थी
एक अटल विश्वास
नानी झूठ नहीं बोलती
किसी को भी अपने
वादों पे नहीं तोलती
आज नहीं है नानी
किन्तु सच होती दीख रही है
उनकी जुबानी सुनी कहानी
क्योंकि चुनावी बिसात
बिछने लगी है
वोटों के मोलभाव की
गठरी दिखने लगी है
हर दिन एक नये वादे
कुछ नेताजी कुछ उनके प्यादे
ओढ़कर लबादे
लब्बोलुआब के लिये
अखबारों के मुखपृष्ठ पर
छाने लगे हैं
सज्जनों भूल जायें बात पुरानी
बीते पाँच सालों की
हम तो योजना अगली पंचवर्षीय
बनाने लगे हैं।।
@**********पद्मनाभ।
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