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इसे अमीरी कहूँ या गरीबी
समझ नहीं आता देखकर
चेहरे से दिखती हैं अमीर
ये सुन्दर तारिकायें तस्वीर में
पर लिबास गरीब बता रहा है
इन बेचारियों को
वैसे संभव हो अमीर ही हों
अपने तथाकथित प्रगतिवादी विचारों से
पर इनके संस्कार लाकर खड़ा करते हैं
दहलीज पर बेहद गरीबी के करीब से
धन्य हैं वे माँ बाप जिनके घर रौशन हैं
इन समुन्नत संस्कारों से जो
देते भारत के उज्जवल भविष्य की
संभावनाओ़ को अभिव्यक्ति का
नया आयाम चीथड़े होने का।।
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@********पद्मनाभ।
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