वर्ण अर्थ रस छंद अलंकार न्यारी
युक्त हमारी बहना हिन्दी प्यारी
भाव सरल अनुभाव तरल बहती
गंगा की पावन धारा सी निर्मल
बस अंक लगालो त्याग गरल अभिमान
अब माँग रहा है फिर से जन मन हर पल
जय हिन्दी जय हिन्दू जय जय हिन्दुस्तान।।
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@***********पद्मनाभ
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