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हालमस्त कोई रामदिवाना।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐हालमस्त कोई राम दिवाना💐💐💐
आज साहित्य के महानायक रामचरिमानस के प्रणेता जिसने गागर में सागर भरकर हरेक आत्मा को तृप्त किया उन महान् संत गोस्वामी तुलसीदास जी के अवतरण एवं महाप्रयाण दिवस के पावन अवसर पर श्री चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित करते हुये उनके जीवन की अंतिम अभिलाषा की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगा।
भगवत्प्रेम के मतवाले तुलसी प्रभु श्रीराम के गुणानुवाद में इतने उन्मत्त हो जाते हैं कि उन्हें अपनी अवस्था का भी भान नहीं रहता।देहानुसंधान को भूल जाते हैं। 
एवं व्रतः स्वप्रियनामकीर्त्या
             जातानुरागो द्रुतचित्त उच्चैः।
हसत्यथो रोदिति रौति
              गायत्युन्मादवन्नृत्यति लोकबाह्यः।।
भगवन्नाम रटन में ऐसे खो जाते हैं कि कभी उच्चस्वर में नाम बोलने लगते हैं,कभी हँसते हैं,कभी रोते हैं,कभी चिल्लाते हैं,और कभी कभी खूब जोर जोर से गाते हुये लोकोत्तर भाव में नाचने लगते हैं। तभी तो अपनी अभिलाषा को अभिव्यक्ति देते हुये कहते हैं-------
अनुराग सो निज रूप जो जग ते बिलच्छन देखिये।
संतोष सम सीतल सदा दम देहवंत न लेखिये।।
निरमल निरामय एकरस तेहि हरष सोक न ब्याप ई।
त्रैलोक पावन सो सदा जाकी दसा ऐसी भ ई।।
परम पूज्य गोस्वामी जी ने सभी मानसावलम्बियों को अपनी अंतिम अभिलाषा में यह संदेश दिया है कि हमें भी श्रद्धापूर्वक नित्य नामजप करते रहना चाहिये।इससे ही इहलोक और परलोक में भी हमें सद्गति मिलेगी।हमारा वास्तविक कल्याण इससे ही संभव है। इस संब़ध में महामना की स्पष्ट घोषणा है कि कलिकाल के विकराल स्वरूप से यदि अपनी रक्षा करनी है तो-----"कसम खाई तुलसी भनी""
तुलसी जो सदा सुख चाहिये तौ रसना निसि बासर नाम रटौ।।क्योंकि----
यह कलिकाल मलायतन मन करि देखु बिचार।
श्री रघुनाथ नाम तजि नाहिन आन अधार।।
कलि नहिं ग्यान बिराग न जोग समाधि।
राम नाम जपु तुलसी नित निरुपाधि।।
महामना का यह विश्वास है कि ----
सपनेहुँ बर्राई कै जा मुख निकसत राम।
ताके पग की पगतरी मेरे तन को चाम।।
अतः आज के इस पावन दिवस की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब महामना के बताये मार्ग का हम अनुसरण करतू हुये तदनुरूप आचरण करें।क्योंकि गोस्वामी जी डंके की चोट पर कहते हैं ----
नाना पथ निरबान के साधन अनेक बहु भाँति।
तुलसी तू मेरे कहे रटु राम नाम दिन राति।।
💐💐💐💐जय जय श्री राम💐💐💐💐

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