विहार करना छोड़ अब
ऐ बिहारी रहनुमा
बुझ रही नित पल पल
घर की जलती शमा
कौन जाने कब छा जाये
मातम तेरे गुलजार कुनबे में
कबतक छुपाओगे दाग
सफेद खद्दर के कुर्ते का
मासूमों की चीख ही काफी हैं
हरम में तेरे पायजामे गीला करने को
बददुआ न ले मजलूम के सूने आँचल का
तेरा दर भी शावकों से खाली नहीं।
*****पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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