ये तो हद हो गई यार
कल तक जिससे थी
नफरत
आज उसी से है हो गया
प्यार
जिस भगवा से था कट्टर परहेज
आज उसको ही रहे सहेज
संत के वेश में शैतान बने महंथ
हठयोग के योग से भोगी बनने को
आतुर हैं अरिहंत
धर्म की राजनीति या राजनीति का धर्म
आम जन को पता नहीं अब तक इसका मर्म
अपशब्दों की बौछार से राजनीति है हो रही
अब तो तार तार
हम तो कुछ भी करेगा पाने को सिंहासन बत्तीसी का सार
ताली बटोरने को हम तो देंगे गाली
मकसद मेरा साफ है पाने को कुर्सी खाली।।
💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*******
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