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बौद्ध धर्म निराशावादी नहीं।

सम्मासम्बुद्धस्स।
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नमो तस्स भगवतो अर्हतो सम्मासम्बुद्धस्स।
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बौद्ध धर्म निराशावादी नहीं।
इस सांसारिक जीवन का त्याग या नाश का तात्पर्य यदि निराशावाद है तो बुद्ध कभी निराशावादी नहीं हो सकते।महात्मा बुद्ध ने अपने चार आर्यसत्यों के अंतर्गत अग्रिम दुःख के कारण और निवारण की बात की है।वे इससे परे शाश्वत का संदेश देते हैं।जीवन के शेष रहते "अप्प दीपो भव"अर्थात् "आत्म दीपो भव"का सदैव उद्घोष करते हैं।जब हम रहेंगे ही नहीं तो आत्म परिष्कार किसका?बल्कि बुद्ध तो बुद्धत्व प्राप्ति के उपरांत सशरीर उपदेश का मार्ग चयन कर यह प्रमाणित भी करते हैं कि इसी जीवन में चिरस्थायित्व ,प्रसन्नता और शांति संभव है।अपने बोध अर्थात् ज्ञान को प्राप्त कर सिर्फ स्वान्तःसुखाय ही उपयोग करना भी बुद्ध का मत नहीं है।यदि ऐसा होता तो दूसरों को उपदेश की बात भी नहीं होती।वे तो अपने अर्जित ज्ञान का लाभ जनसामान्य तक पहुँचाना चाहते हैं।यह स्पष्ट संदेश है कि बुद्ध सदैव शिवत्व भाव में जीते हैं।अतः महात्मा बुद्ध. या बौद्ध मत कदापि निराशावादी नहीं अपितु सदैव आशावादी है।
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बुद्ध जयंती विशेष पर आप सबों को हार्दिक शुभकामना।
               💐💐नमो बुद्धाय💐💐
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                               💐💐@पद्मनाभ💐💐

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