अज़ब हूँ
गजब भी हूँ
पर सारी कायनात
के लिये एक शबब भी हूँ।
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नहीं बे अदब किसी के लिये
हूँ बा अदब आदमी के लिये।
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करता नहीं चाकरी मैं चाकरों के लिये
झुकता है ये सर सिर्फ सज़दे के वखत।
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दीवानगी के हद को पार पाना चाहता हूँ
आसमां से तारों को तोड़ लाना चाहता हूँ।
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तेरी हर अदा मुझको सुकून देती है
जिंदा हूँ तो बस अहले चमन के लिये।
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💐💐@पद्मनाभ*****
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