मैं बैठा रहा इंतजार में तेरे आने के
विश्वास था आओगे जरूर मेरे बुलावे पर
पर हुआ वही ढाक के तीन पात
न आये थे न आये न आओगे अपनो के घर।।
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फिर न कहना कभी बुलाया नहीं
ये न कहना कभी कुछ कर दिखाया नहीं
क्योंकि जब जब भी कुछ कर दिखाने को चाहा
तुमने कभी आगे हाथ बढ़ाया नहीं।।
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मैं उल्लू हूँ
उल्लू का पट्ठा नहीं
जनसामान्य के लिये
सिद्धांत बघारना तो आता है
पर समाज कल्याण को आगे
आना बच्चों का हँसी खेल ठठ्ठा नहीं।
💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*********
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