मैं!
उस समन्दर के किनारे खड़ा हूँ
जो शांत स्थिर धीरे धीरे बढ़ रहा है
शायद अपने निश्चित गंतव्य की ओर
तभी अचानक से शोर मचाता तूफान
लहरों के वेष में सामने से आता दीख गया
और फिर सबकुछ तहस नहस
कुछ क्षण को लगा दुबारा शायद
नहीं देख पाऊँगा समंदर के किनारे का
वो दिलकश नजारा परंतु ये क्या
फिर वही नीरवता शांति सबकुछ स्थिर
ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं।।
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💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐
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