कभी कभी बेमतलब भी
किसी का दरवाजा खटखटा दीजिये
न हो जान पहचान फिर भी
अपनी पहचान जना दीजिये
फटकार ही सही कुछ तो मिला
इसी बहाने शुरु तो हुआ
एक अन्जान शख्सियत से
मिलने का सिलसिला
जब हो जायें शुरु बातें आपकी
बीच बीच में थोड़ा मुस्कुरा दीजिये
कभी जब टोली मिले बच्चों की शरारती
थोड़ा उनके बीच भी समय बिता लीजिये
ना सही हम उम्र कहीं मिल जायें बुजुर्ग अगर
बेमन से ही सही थोड़ा सिर को झुका लीजिये
गर दिख जायें राह में तीरे नज़र
कटते हुये ही सही कभी नज़र तो मिला लीजिये
क्यूँ रुसबाई हैं जिन्दगी से कर रहे
किसी को तो हमसफर बना लीजिये
रोइये न जिंदगी का रोना कभी
जो मिला है उसी में मगन होइये।।
💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐
Comments
Post a Comment