बाबू ई बिहार हे!
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अरे बाबू ई बिहार हे
इहां पढनिहारन के बहार हे।
न स्कूल न कालेज
न पढ़वेवालन के दरकार. हे
चोरी चकारी घूस दरबारी
पैरवी आउ लठमारन के भरमार हे।
अरे बाबू................।.
बाबूजी के कहलापर
नाम लिखौली मन के मार
गेली पढ़े बस्ता लेके
उहां देखली जूतम पैजार हे।
अरे बाबू.................।
सोंच लेलक तहिए मन हमर
बस्ता ढोएब न करब दूसर
खादी के कुर्ता लंबाआउ
पैजामा सटकदार हे।
दुनो कंधा पर गमछा लहरदार हे।
अरे बाबू............।
घरे आके सूत गेली हम
मार खराटा खरर खरर
मैया आके डंटलक जब
कहली तोहनी भटक दर दर
पढ़ल लिखल पंडित बनल
सब्भे इहां बेकार हे
लाओ लाठी तेल पिआएम
फेंक कलम दे बस्ता ओने
एकरे से सरकार हे।
अरे बाबू............।
बिन पढ़ले बन जायम मंत्री
पढ़ला से रह जायम संत्री
आइएस आइपिएस कुछो होएब
अइसन नौकर के भरमार हे।
अरे बाबू............।
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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