वक्त बीतता नहीं रहता हूँ परेशान
कर याद बीते वक्त को अब हो रहा हैरान
कल तलक भीड़ में था खोया हुआ
अब तड़पता हूँ जब अकेला हुआ
अहमियत वक्त की है वक्त पर ही दोस्तों
वक्त का मारा हुआ आंसू बहाता रह गया
मित्र हो या शत्रु कि पहचान है बस वक्त ही
जिसने न जाना वक्त को हैरान है बेवक्त ही
दौलत भी लाता वक्त ही शोहरत दिलाता है
गर वक्त दे ना साथ जो हिम्मत डोलाता है
वक्त का मारा हुआ इन्सां गर टूट जाता है
फिर वक्त ही उंगली पकड़ बढ़ना सिखाता है
वक्त देगा साथ जो वक्त की पहचान कर
उंगली पकड़ तू वक्त की मित्र तेरा जानकर
कल तलक भी वक्त था है आज भी तो वक्त ही
कल भी होगा वक्त तेरे साथ मनुज पहचान कर।।
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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