योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः
पातञ्जलयोग सूत्र के अनुसार योग से चित्त की वृत्तियों का शमन होता है।अर्थात् योग हमें हमारे चित् को शुद्ध कर दुष्प्रवृत्तियों से इतर सद्प्रवृत्तियों की ओर ले जाता है।और जब हम सद्वत्तियों को धारण कर लेते हैँ तब हमारा योग पराशक्तियों से होता है।अर्थात हम ईश्वर का साक्षात्कार कर पाने में सक्षम हो पाते हैं।त्रेलोक्य योगेश्वर भगवान कृष्ण ने संपूर्ण गीता में इसे ही प्रतिभाषित किया है।तभी तो स्वयम् कहते हैं"योगक्षेमं वहाम्यहम्"।
अतः आज विश्व योग दिवस पर जगतियोगेश्वर श्री कृष्ण को नमन निवेदित करते हुए आप सबको अशेष शुभकामनाएं ।
योगः कर्मसुकौशलम्।।
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

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