ई छुछुरबुद्धि से का होयतो
सब गुड़ गोबर का बेटी बचतो।
रेत रेत के मारे से बढ़िया
एके तुरि गरदन उतार द।
बच जैतो इज्जत कुरसी भी रहतो
पतुरिया ई तोरे हौ तोरे हीं जयतो।
भुखल रहे से पेट पिरैतो
लोगवा सब एकरा नखड़ा बतैतो।
हमनी के का हे अरक्षित ही कौनो
बाबा कहा ही काम करी जौनो।
सत्तर बरिस में न बनल अमीर
बकि बेच देल तु तो सबके जमीर।
बाले बच्चे मिलके लुटल तु घरके
तैयो दलिदर ह तोहनी सहर के।
भाई जैसन मान हली तोहरा सहोदर
हमरा का मालुम तोरा होल हे जलोदर।
फेर मे तु पड़के मेहरिया राजनीति के
घर के उजाड़ देल तोड़ अप्पन भीत के।
अब केतना बांटब बचलो हे कौची
भगबानो के न छोड़ल अब हम का सोची।
💐💐मनोज💐💐
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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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