यहाँ गौयें पलती हैं कुत्ते आवारा घूमते हैं
कहीं भारत का गांव तो नहीं?
यहाँ कुत्ते पलते हैं गौयें आवारा घूमती हैं
कहीं ये विकसित शहर तो नहीं?
फूस की झोपड़ी में सुकून की नींद आती है
चैन से कहीं ये भारत के गांव तो नहीं?
रंग बिरंगी रोशनी से लकदक कंकरीट के महल
ए,सी.में भी पेशानी पे शिकन कहीं यह शहर तो नहीं?
मंगरू भाई बुधन चाचा के संग शाम से देर रात तक
देवी मंडप में ढोल मंजीरे के साथ लोकधुन
कहीं ये भारत के गांव तो नहीं?
शाम से पहले सब दरवाजे बंद
अंकल आंटी गुड्डु पप्पू सब टी. वी. के संग
कहीं ये विकासशील नगर तो नहीं?
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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